हाँ बड़ा आसानसा लगता है
यूँ जीना कहते रहते हैं
हम अकसर"बढ़िया है
"सच जान करझूठ बोल देते है
औरों सेया ख़ुद से? बढ़िया है
!!"एक बात बोलूं ?
जितनी muhabbat मेने तुमसे की
कोई क्या कर पाएगा...!!?
हाँ तुमअपने हमसफ़र को
अपनी मोहब्बत की
चादर ओढ़ा कररखोगे॥
वो भीतुम्हेमोहब्बत केबिस्तर पर रखेगा॥
शायद फूलों सासज़ा कर रखेगा...
सीने से लगाकररखेगा॥"बढ़िया है॥!!
"हाँ यार"बढ़िया है "
बस कोईये बता दे
अपनी मोहब्बत के
चादर काक्या करूमैं ?
न मैं ओढ़ सकता हूँ॥
न मैं फेंक सकता हूँ॥
मैं उस चादर को
बक्से मे बंदरखता हूँ
उसस बक्से कोदिल की कोठरी में
बंद रखता हूँ ॥यही "बढ़िया है॥
"मुझे अपनेख़ूबसूरत चादरकी
नुमाइशभद्दी लगती है॥
लोग कहते हैं
अगर चादर है
उसको दिखाओ
घर में सजाओ॥
मैं कहता हूँ
मेरी चादरबक्से में ही"बढ़िया है
"Khwaab jalaye hain,
tej aanch par।
Samajhdari pakegi shayad ...
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