हर रात के बाद आती हे,सुबह
अँधेरा मेरे इंतजार का खत्म होता नही
हर समुन्दर को मिलता हे कोई किनारा
साहिल मेरी कश्ती को मिलता नही
लम्हे कम पड़ जाते हे तुझे सोचते हुए
पर जिस लम्हा तू आये, वो मेरी ज़िंदगी मे नही
गर वो मिला देता हमे, तो क्या मे जी पाता
उन लम्हों के बिना जिनमे चाँद बनकर तू चमकती हे
प्यार के उस भंवर के बिना जिसमे पल डूबती हे मेरी कश्ती
हर एक उस लम्हे के बिना , जिसे जिया हे,
मेने एक एक जिंदगी की तरह ........
तेरे प्यार मे....................
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