Wednesday, March 26, 2008

aadte bhi ajeeb hoti he

आदतें भी अज़ीब होती hai
tumhari आदतकाजल लगाना..
.बिन बात के रोना...
मेरी आदत ये कहना"काजल क्यों लगाते हो"
"और अगर लगाते हो..तो क्यो रोते हो ...

"आदतें भी अजीब होती हैं ....
किसी भी काम सेघर से निकलता हूँ
और रास्ते ना जाने कैसे
तुम्हारे घर के सामने पहुँचा देते
आदतें भी अज़ीब होती है ..

आदतें भी अज़ीब होती है ..
अम्मा का फ़ोने आता हैवो कहती है
"Bauaa तुम्हारे लिए रिश्ता देखा है.."
मैं इस बात से खीज़ जाता
उनको कैसे समझाउ
मेरे वाज़ूद का आगाज़ भीतुम थी
और अंत भी तुम हो.
अम्मा समझ नही
मैं समझा नही सकता

आदते भी अज़ीब होती हैं
तुम्हारी छोटी छोटी ग़लतियाँ
जिन पर मुझे ग़ुस्सा आता था
और मेरे नाराज़ होने से पहले
तुम sorry बोल देते थे
मैं तुम्हारी sorryतुम्हारी मुस्कुराहट में
सब कुछ भूल जाता था....

अब भी जब ग़ुस्सा आता है
तुम्हारा वो चेहरा याद करता हूँ
और सब कुछ भूल जाता हूँ
आदतें भी अज़ीब होती हैं

आदतें भी अज़ीब होती हैं
कलम ले करकुछ लिखने बैठता हू
तुम्हारा चेहरा काग़ज़ पेउभर आता
मैं "ख़ूबसूरत" लिख कर
चेहरे में खो जाता हूँ

आदतें भी अज़ीब होती है
जब जीने की वज़हेंकम पड़ती..
तुम्हारी आवाज़ सुन लेता..
फिर- दिल से चिल्ला कर कहता
"सुनो !!वो ख़ुश है , तुम भी ख़ुश हो जाओ.
"मैं कुछ दिन और जी लेता
थोड़ी साँसे और ले लेता..
आदतें भी अज़ीब होती है...

कल रात एक कविता लिखी
आदतें भी अज़ीब होती हैं
दिल किया तुमको सुनाउ
फिर होश आया....
तुम आगे...बहुत आगेनिकल गये हो...
मुझसेतुम्हे फ़ुरसत कहाँ...
आदतें भी अज़ीब होती हैं

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